जैसलमेर : राजस्थान में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में के सीट बेहद सुर्ख़ियो में रही. यह थी जैसलमेर की पोखरन सीट. परमाणु परीक्षण के लिए इतिहास में दर्ज हो चुकी यह जगह विधानसभा चुनावों में भी बेहद विस्फोटक बनी रही. दरअसल इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा ने धार्मिक गुरुओं को अपना उम्मीदवार बनाया था. जहाँ कांग्रेस की और से मुस्लिम धर्म गुरु सालेह मोहम्मद प्रत्याशी थे तो वही भाजपा की और से हिंदू संत महाराज प्रताप पुरी को खड़ा किया था.

बेहद दिलचस्प रही इस सीट पर मतगणना भी दिलचस्प ही रही और केवल 872 वोटों से सालेह मोहम्मद इस सीट को जीतने में कामयाब रहे. इस जीत का फल सालेह मोहम्मद को मिला और राजस्थान सरकार में उनको मंत्री बनाया गया. यह पहला मौक़ा था जब दो विधानसभा सीटों वाली जैसलमेर के किसी विधायक को मंत्री बनाया गया. सालेह मोहम्मद, राजस्थान सरकार में अकेले मुस्लिम मंत्री है.

मंत्री बनने के बाद सालेह मोहम्मद ने सांप्रदायिक सद्भावना का एक उदाहरण पेश किया है. उन्होंने यहाँ के शिव मंदिर में 31 दिसंबर को पहुंचकर रुद्राभिषेक किया. इस पर उनका कहना है कि उनकी मंदिर और भगवान में आस्था है. वह शपथ लेने से पहले भी रामदेवरा मंदिर गए थे और वहाँ पूजा-अर्चना की थी. सालेह मोहम्मद ने बताया कि उन्होंने दोनों मंदिरों में पूजा करके प्रदेश के लिए शांति, खुशहारी और समृद्धि मांगी. उन्होंने कहा, ‘मेरी और मेरे परिवार की हमेशा से ही हिंदू धर्म और मंदिरों में आस्था रही है. मुझे जब भी मौका मिलता है, मैं हमेशा मंदिर जाता हूं.’

बताते चले की सालेह मोहम्मद मुस्लिम धर्म गुरु गाजी फाकिर के बेटे हैं. गाजी फाकिर जैसलमेर-बाड़मेर के भारत-पाकिस्तान बॉर्डर में रहने वाले सिंधी मुस्लिम समुदाय के धार्मिक गुरु हैं. सालेह मोहम्मद ने सोमवार की शाम को शिव मंदिर में पहुंचकर रुद्राभिषेक किया. संत मधुसूदन ने मंत्र पढ़े, सालेह मोहम्मद के माथे पर चंदन लगाया और कलाई में रक्षासूत्र भी बांधा. 

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