नई दिल्ली : अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के निर्माण को मुद्दा बनाकर सत्ता के शिखर तक पहुँची भाजपा, 30 सालों में भी मंदिर निर्माण नही करा पायी. इस दौरान वह क़रीब चार बार केंद्र और तीन बार प्रदेश की सत्ता में रह चुकी है. पीछले 5 सालों से वह एक बड़े बहुमत से केंद्र और प्रदेश की सत्ता पर क़ाबिज़ है. लेकिन मंदिर निर्माण को लेकर आज भी उनका वही रटा रटाया बयान सामने आता है की मंदिर वही बनाएँगे. 

बरहाल मंदिर तो नही लेकिन प्रदेश की योगी सरकार अयोध्या में भगवान राम की भव्य मूर्ति ज़रूर स्थापित करने जा रही है. इसके लिए सरयू नदी को चुना गया है. भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण के लिए आस-पास बसे 200 घरों को खाली करने का नोटिस भी जारी किया गया है. बताते चले की योगी सरकार ने अयोध्या में भगवान राम की 221 मीटर ऊंची प्रतिमा के निर्माण का ऐलान किया था.

उससे पहले राम की लकड़ी की दुर्लभ प्रतिमा रामनगरी की शोभा बढ़ाने वाली है. बीते 25 मई को अयोध्या शोध संस्थान के संग्रहालय में स्थापित करने के लिए कर्नाटक से 7 फुट की काष्ठ प्रतिमा खरीद कर लाई गई. इसे कर्नाटक के कावेरी कर्नाटक स्टेट आर्ट्स एवं क्राफ्ट इंपोरियम से 35 लाख में खरीदी है. 7 फुट की इस प्रतिमा को बनाने वाले कारीगरों की मानें तो इसके निर्माण में 3 साल से अधिक का समय लगा है. यह प्रतिमा काष्ठ कला की दुर्लभ कृतियों में शामिल है. यह टीकवुड की बनी काष्ठ कला की दुर्लभ कृतियों में से एक है, जिसे 2017 में राष्ट्रपति की ओर से पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
 

सीएम योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक 221 मीटर ऊंची राम प्रतिमा काम शुरू हो गया है. इसमें 151 मीटर की प्रतिमा होगी, उसके ऊपर 20 मीटर ऊंचा छत्र बनेगा और नीचे 50 मीटर ऊंचा बेस बनेगा. इसमें राम कथा का म्यूजियम, लाइब्रेरी, राम जन्मभूमि मंदिर का इतिहास दर्शाने वाली सामग्री व देश विदेश की राम लीलाओं से जुड़े दुर्लभ चित्र लगाए जाएंगे.

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