न्यूज़ डेस्क: यह बात तो हम सभी जानते हैं कि तनाव, स्मोकिंग, एक्कोहॉल के सेवन, एक्सरसाइज न करना और अच्छी डाइट न लेना आदि  कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का कारण बनते हैं। लेकिन आपको जानकर थोड़ा आश्चर्य हो सकता है कि आपके अस्वस्थ दांत और मसूड़े भी हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकते हैं। तो चलिये जानें कि दांतो और हृदय स्वास्थ्य के बीच क्या संबंध है।  

जर्नल ऑफ पेरीडॉन्टोलजी के संस्करण में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, दांतों के जिन मरीजों में पेरिओडॉन्टाइटिस के बैक्टीरिया की गतिविधि अधिक होती है, उनमें कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का प्रतिशत अधिक हो जाता है।पेरिओडॉन्टाइटिस बैक्टीरिया को पहले पायरिया अल्वोलेरिस कहा जाता था। इस बीमारी में दांतों के आस-पास के टिश्यू संक्रमण के हो जाने के कारण गलने लगते हैं। और फिर धीरे-धीरे इसका असर हड्डियों पर होने लगता है, जिस कारण दांत गिर जाते हैं। 

जर्नल ऑफ पेरीडॉन्टोलजी के एडिटर केनथ कॉर्नमैन के अनुसार, पहले भी कई बार दांतों की समस्याओं और दिल की बीमारियों के संबंध पर हुए। हालांकि ऐसा क्यों, किस प्रकार और किन परिस्थितियों में होता है, इसके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है। हालांकि ऐसा क्रॉनिक पेरिओडॉन्टाइटिस की स्थिति में होता है। क्योंकि, इस स्थिति में मुंह में बैक्टीरिया की गतिविधियां इतनी बढ़ जाती हैं कि इनसे दिल को नुकसान होने लगता है। 

जब शोध के दौरान 11 ऐसे मामलों का गंभीरता से अध्ययन किया गया, जिनमें पेरिओडॉन्टाइटिस और कॉर्डियोवैस्कुलर दोनों ही डिजीज मौजूद थीं, तो पता चला कि जिन केसेज में बैक्टीरिया की एक्टिविटीज अधिक थीं, उनमें कॉर्डियोवैस्कुलर जिजीज का प्रतिशत उतना ही अधिक मिला। 

यूं तो शरीर के किसी भी हिस्से में लंबा संक्रमण रहने से दिल को हानि पहुंच सकती है। लेकिन दांतों का दिल की बीमारियों से संबंध इसलिए भी है, क्योंकि दांतों का खाने से निरंतर संपर्क रहता है। जिस कारण यहां इन्फेक्शन की आशंका सबसे अधिक होती है। एक शोध से यह भी पता चला कि यदि मसूडे में बैक्टीरिया के कारण जिंजिवाइटिस इन्फेक्शन हो जाए तो इससे बैक्टीरिया खून के माध्यम से दिल तक पहुंच सकता है। और दिल की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है। जिसके चलते हार्टअटैक का जोखिम  बढ़ जाता है। 

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