नई दिल्ली : ई-कॉमर्स में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का नया नियम शुक्रवार से लागू हो गया, जिसके साथ ही ग्राहकों को मिलने वाली कई सुविधाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। नई व्यवस्था में ग्राहकों को सामान न सिर्फ पहले के 1-2 दिन की तुलना में कम से कम 4-7 दिनों में मिलेगा, बल्कि इसके लिए उन्हें कीमत भी तुलनात्मक रूप से अधिक चुकानी पड़ेगी।

नए नियमों का सर्वाधिक असर ऐमजॉन पर पड़ा है, जिसने अपने प्लेटफॉर्म से मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रॉसरी और फैशन सहित कई श्रेणियों में भारी मात्रा में उत्पादों को हटाना पड़ा है। क्लाउडटेल और ऐपेरियो जैसे सेलर्स ने काम करना बिल्कुल बंद कर दिया है। इन दोनों कंपनियों में ऐमजॉन की हिस्सेदारी है। शुक्रवार को दिसंबर तिमाही के वित्तीय नतीजों की घोषणा के बाद कंपनी के सीएफओ ब्रायन ओलसावस्की ने विश्लेषकों से कहा कि नई पॉलिसी का असर भारत में प्राइसिंग और उपभोक्ताओं के चयन के साथ-साथ सेलर्स पर पड़ेगा।

वैश्विक तौर पर ऐमजॉन के अंतरराष्ट्रीय कारोबार को 64.2 करोड़ डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है, जो इसके पहले के वित्त वर्ष की समान तिमाही में 91.9 करोड़ डॉलर था। ऐमजॉन के भारत में आक्रामक रूप से निवेश को वैश्विक कारोबार में लगातार हो रहे घाटे की भरपाई माना जा रहा है। आलोच्य अवधि में ऐमजॉन की वैश्विक बिक्री बढ़कर 21 अरब डॉलर रही, जो पिछले साल की समान अवधि में 18 अरब डॉलर थी।

फ्लिपकार्ट ने भी एक बयान जारी कर कहा कि वह सरकार द्वारा नियमों के अनुपालन की डेडलाइन न बढ़ाने के कदम से नाराज है। नए नियमों का फ्लिपकार्ट पर हालांकि तत्काल कोई फर्क नहीं होने जा रहा है, क्योंकि इसके बड़े सेलरों में इसकी सीधे तौर पर कोई हिस्सेदारी नहीं है, लेकिन गोदाम में पड़ा मौजूदा माल खत्म होने ब्रैंड के साथ समझौते को रिस्ट्रक्चर करने से आने वाले हफ्तों में असर दिखना शुरू हो जाएगा।

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